![]()
Certificate: View Certificate
Published Paper PDF: View PDF
Confirmation Letter: View
डॉ. पूनम देवी
सहायक प्राध्यापक
महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय
धैड़ डी गांव, ब्लॉक-पोखरा, जिला-पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड, पिन-246169
सारांश : डिजिटल संचार ने मनुष्य के संबंधों, आत्मपहचान, स्मृति, भाषा और सार्वजनिक अभिव्यक्ति की परिस्थितियों को बदल दिया है। समकालीन हिंदी कथा साहित्य के अध्ययन में इन परिवर्तनों को केवल मोबाइल, इंटरनेट अथवा सोशल मीडिया के उल्लेख तक सीमित करना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल जीवनबोध उस अनुभव-संरचना को व्यक्त करता है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को निरंतर संपर्क, सार्वजनिक दृश्यता, ऑनलाइन पहचान और तकनीकी मध्यस्थता के माध्यम से समझता है। प्रस्तुत लेख डिजिटल संस्कृति संबंधी सत्यापित शोध-साहित्य, हिंदी लघु प्रेमकथा की प्रकाशन-संबंधी जानकारी तथा विनीत कुमार की पुस्तक इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं के प्रकाशक द्वारा उपलब्ध कराए गए पाठांश के आधार पर इस अवधारणा का विवेचन करता है। अध्ययन का स्वरूप गुणात्मक और व्याख्यात्मक है। विश्लेषण डिजिटल पहचान, संबंधों की मध्यस्थता, भाषिक मिश्रण तथा डिजिटल और भौतिक अनुभव के अंतर्संबंध पर केंद्रित है। उपलब्ध सामग्री से यह तर्क विकसित होता है कि डिजिटल जीवनबोध तकनीकी उपकरणों की उपस्थिति से अधिक व्यापक सांस्कृतिक स्थिति है। हिंदी कथा के अध्ययन में इसकी पहचान के लिए पाठ-साक्ष्य, प्रकाशन-माध्यम और कथात्मक कार्य को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
बीज शब्द: समकालीन हिंदी कथा, डिजिटल जीवनबोध, सोशल मीडिया, लप्रेक, आत्मपहचान, कथात्मक शिल्प।
संदर्भ सूची
- अंग्रेज़ी कृतियों के शीर्षकों का हिंदी अनुवाद दिया गया है; ये उनके प्रकाशित हिंदी संस्करण होने का दावा नहीं हैं। सत्यापन के लिए मूल प्रकाशनों के लिंक संलग्न हैं।
- बॉयड, डी. (2014)। यह जटिल है: नेटवर्क से जुड़े किशोरों का सामाजिक जीवन। येल यूनिवर्सिटी प्रेस। प्रकाशक लिंक
- बॉयड, डी. एम., एवं एलिसन, एन. बी. (2007)। सामाजिक नेटवर्क साइटें: परिभाषा, इतिहास और शोध। जर्नल ऑफ कंप्यूटर-मीडिएटेड कम्युनिकेशन, 13(1), 210–230। https://doi.org/10.1111/j.1083-6101.2007.00393.x
- ब्राउन, वी., एवं क्लार्क, वी. (2006)। मनोविज्ञान में विषयगत विश्लेषण का उपयोग। क्वालिटेटिव रिसर्च इन साइकोलॉजी, 3(2), 77–101। https://doi.org/10.1191/1478088706qp063oa
- हेल्स, एन. के. (2008)। इलेक्ट्रॉनिक साहित्य: साहित्यिक सृजन के नए क्षितिज। यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम प्रेस। विश्वविद्यालयीय पुस्तक-सूची
- हेल्स, एन. के. (2012)। हम कैसे सोचते हैं: डिजिटल मीडिया और समकालीन तकनीकी सहविकास। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो प्रेस। प्रकाशक लिंक
- शिएह, एच.-एफ., एवं शैनन, एस. ई. (2005)। गुणात्मक विषयवस्तु विश्लेषण के तीन उपागम। क्वालिटेटिव हेल्थ रिसर्च, 15(9), 1277–1288। https://doi.org/10.1177/1049732305276687
- जेनकिंस, एच. (2006)। अभिसरण संस्कृति: जहाँ पुराने और नए मीडिया का सामना होता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी प्रेस। प्रकाशक लिंक
- लोविंक, जी. (2011)। उद्देश्यहीन नेटवर्क: सोशल मीडिया की आलोचना। पॉलिटी प्रेस। संस्थागत प्रकाशन-अभिलेख
- मैनोविच, एल. (2001)। नए मीडिया की भाषा। एमआईटी प्रेस। प्रकाशक लिंक
- मारविक, ए. ई., एवं बॉयड, डी. (2011)। मैं ईमानदारी से ट्वीट करता हूँ, मैं भावपूर्ण ढंग से ट्वीट करता हूँ: ट्विटर उपयोगकर्ता, संदर्भों का विलय और कल्पित दर्शक। न्यू मीडिया एंड सोसाइटी, 13(1), 114–133। https://doi.org/10.1177/1461444810365313
- टर्कल, एस. (2011)। साथ होकर भी अकेले: हम तकनीक से अधिक और एक-दूसरे से कम अपेक्षा क्यों करते हैं। बेसिक बुक्स। एमआईटी प्रकाशन-सूची
- टर्कल, एस. (2015)। संवाद की पुनर्प्राप्ति: डिजिटल युग में बातचीत की शक्ति। पेंगुइन प्रेस। प्रकाशक लिंक
- कुमार, रवीश। (2015)। इश्क़ में शहर होना। सार्थक, राजकमल प्रकाशन का उपक्रम। संस्थागत अभिलेख—प्रथम संस्करण के वर्ष की पुष्टि
- कुमार, विनीत। (2015)। इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं। सार्थक, राजकमल प्रकाशन का उपक्रम। प्रकाशकीय पाठांश प्रकाशन-वर्ष की पुष्टि