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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v13.i5.4
सीमा देवी
शोधार्थी
देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब), भारत
डॉ० अरविन्द्र कौर चुंबर
शोध मार्गदर्शिका
देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब), भारत
सारांश— समकालीन हिंदी कथा साहित्य भारतीय समाज में घटित सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा लैंगिक परिवर्तनों का सशक्त दर्पण है। इस साहित्य में सामाजिक असमानता और स्त्री चेतना प्रमुख विमर्शों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। एस०आर० हरनोट समकालीन हिंदी कहानी के ऐसे महत्वपूर्ण कथाकार हैं जिन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं पर्वतीय समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, वर्गीय विषमता, अंधविश्वास, शोषण तथा स्त्री जीवन की जटिल समस्याओं को अपनी कहानियों का विषय बनाया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य एस०आर० हरनोट की कहानियों के माध्यम से सामाजिक असमानता और स्त्री चेतना के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करना है। हरनोट की कहानियाँ समाज के हाशिए पर स्थित वर्गों, विशेषकर महिलाओं और दलित समुदायों के संघर्ष, पीड़ा और प्रतिरोध को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उनके स्त्री पात्र पारंपरिक बंधनों से संघर्ष करते हुए आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की आकांक्षा को स्वर प्रदान करते हैं। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हरनोट का कथा साहित्य केवल सामाजिक यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक परिवर्तन की चेतना को भी सुदृढ़ करता है। इस प्रकार उनका साहित्य समकालीन हिंदी कथा परंपरा में महत्वपूर्ण सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में स्थापित होता है।
मुख्य शब्द— समकालीन हिंदी कथा साहित्य, एस०आर० हरनोट, सामाजिक असमानता, स्त्री चेतना, ग्रामीण समाज, दलित विमर्श, सामाजिक न्याय।
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