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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v14.i2.2
कुंवर मंगेश प्रल्हाद
महाराजा अग्रसेन हिमालय गढ़वाल विश्वविद्यालय
उत्तराखंड, भारत
सार
प्रस्तुत शोध-पत्र “1920- 1950 के दौरान महाराष्ट्र में दलित आंदोलन के विकास में मराठी पत्रकारिता की भूमिका” का ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह कालखंड भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ सामाजिक न्याय और दलित चेतना के सशक्त उभार का समय रहा है। महाराष्ट्र में दलित आंदोलन के विकास में मराठी पत्रकारिता ने एक प्रभावी माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय की मुख्यधारा की पत्रकारिता में दलित प्रश्नों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल रहा था, जिसके परिणामस्वरूप दलित समाज की अपनी पत्रकारिता का उदय हुआ।
मराठी दलित पत्रकारिता ने न केवल दलितों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक समस्याओं को उजागर किया, बल्कि जाति-आधारित भेदभाव, अस्पृश्यता और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध जनजागरण का कार्य भी किया। ‘मूकनायक’, ‘बहिष्कृत भारत’ और ‘समता’ जैसी पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से दलित समाज को एक वैचारिक मंच प्राप्त हुआ, जहाँ उनके अधिकारों, संघर्षों और आकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया गया। इन पत्रों ने दलित आंदोलन को संगठित करने, समाज में आत्मसम्मान की भावना विकसित करने और सामाजिक समानता की चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस शोध में ऐतिहासिक एवं वर्णनात्मक शोध-पद्धति का प्रयोग किया गया है। अध्ययन के लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है, जिनमें समकालीन पत्र-पत्रिकाएँ, पुस्तकों और शोध आलेखों का विश्लेषण शामिल है। शोध से यह स्पष्ट होता है कि मराठी पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं थी, बल्कि वह दलित आंदोलन की वैचारिक शक्ति बनकर उभरी। इसने दलित समाज को संगठित किया, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया।
मुख्य शब्द: मराठी पत्रकारिता, दलित आंदोलन, महाराष्ट्र, सामाजिक न्याय, 1920- 1950
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