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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v9.i6.1
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डॉ गीता दुबे
सहायक प्राध्यापक ( हिंदी)
ब्रह्मावर्त पी•जी• कालेज मंधना, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश,
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय,कानपुर नगर
सारांश— छायावादोत्तर हिंदी कथा-साहित्य में जैनेंद्र कुमार का स्थान एक ऐसे कहानीकार के रूप में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिन्होंने कहानी को बाह्य घटनाओं के वर्णन से हटाकर मनुष्य के आंतरिक जीवन की जटिलताओं की ओर उन्मुख किया। उनकी कहानियाँ मनोवैज्ञानिक यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जहाँ व्यक्ति की चेतना, अवचेतन, द्वंद्व, नैतिक संघर्ष और आत्मसंघर्ष कथा का केंद्रीय आधार बनते हैं। छायावाद के बाद के संक्रमणकाल में जब हिंदी साहित्य सामाजिक यथार्थ और वैचारिक आंदोलनों की ओर अग्रसर हो रहा था, उस समय जैनेंद्र कुमार ने व्यक्ति की मानसिक अनुभूतियों को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।
प्रस्तुत अध्ययन में जैनेंद्र कुमार की कहानियों में निहित मनोवैज्ञानिक यथार्थ का विश्लेषण किया गया है। उनकी कथा-रचनाओं में कथानक गौण और पात्रों की आंतरिक चेतना प्रधान होती है। आत्मविश्लेषण, आत्मसंवाद, संकोच, अपराधबोध, प्रेम, दांपत्य तनाव, नैतिकता और सामाजिक दबाव जैसे तत्व उनकी कहानियों को गहराई प्रदान करते हैं। वे पात्रों के मनोभावों को सूक्ष्म संकेतों, प्रतीकों और अंतर्मुखी शैली के माध्यम से व्यक्त करते हैं, जिससे पाठक सीधे पात्रों की मानसिक दुनिया से जुड़ जाता है।
यह शोध निष्कर्षतः स्थापित करता है कि जैनेंद्र कुमार ने हिंदी कहानी को मनोवैज्ञानिक गहराई, वैचारिक गंभीरता और मानवीय संवेदना से समृद्ध किया। उनकी कहानियाँ केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य की आत्मा का साहित्यिक दस्तावेज हैं, जो छायावादोत्तर हिंदी कथा-साहित्य को नई दिशा और वैचारिक विस्तार प्रदान करती हैं।
बीज शब्द— छायावादोत्तर कहानी, जैनेंद्र कुमार, मनोवैज्ञानिक यथार्थ, आत्मसंघर्ष, आंतरिक चेतना, नैतिक द्वंद्व, मानवीय संवेदना
संदर्भ सूची
- जैनेंद्र कुमार — प्रतिनिधि कहानियाँ, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
- जैनेंद्र कुमार — सुनीता, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली
- नामवर सिंह — कहानी नई कहानी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
- रामविलास शर्मा — हिंदी कहानी : विकास और प्रवृत्तियाँ, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
- डॉ. बच्चन सिंह — हिंदी साहित्य का इतिहास, लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज
- नगेन्द्र — आधुनिक हिंदी कहानी, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली
- प्रेमचंद — साहित्य का उद्देश्य (निबंध/संकलन), विभिन्न मान्य संस्करण