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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v14.i1.1
डॉ रचना जयसवाल
सहायक प्राध्यापक
दर्शनशास्त्र विभाग
गंगा देवी महिला महाविद्यालय
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना
सारांश : भारतीय दर्शन में मानव जीवन के लिए चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को अनिवार्य माना गया है, जिसमें मोक्ष को मनुष्य का चतुर्थ और सर्वोच्च पुरुषार्थ माना गया है। अन्य तीन पुरुषार्थों को मोक्ष प्राप्ति के साधनों के रूप में स्वीकार किया गया है। मोक्ष की अवस्था में सभी प्रकार के दुःखों का पूर्ण नाश हो जाता है। भारतीय दर्शन में मोक्ष-प्राप्ति के मार्ग केवल दार्शनिक चिंतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानव जीवन को नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक रूप से परिष्कृत करने का प्रयास भी करते हैं। परिणामस्वरूप कुछ दर्शन के अनुसार आत्म-ज्ञान या तत्व-ज्ञान मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख साधन है, जबकि कुछ के अनुसार निष्काम कर्म द्वारा भी मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कुछ दर्शन भक्ति को मोक्ष का मुख्य साधन मानते हैं। इस प्रकार भारतीय दर्शन में मोक्ष प्राप्ति के लिए मुख्य तीन मार्गो का विवेचन किया गया है : १)ज्ञान-मार्ग, २) कर्म-मार्ग और ३) भक्ति-मार्ग । भगवद्गीता में इन तीनों मार्गों को आवश्यक और परस्पर पूरक माना गया है। व्यक्ति अपने स्वभाव और क्षमताओं के अनुसार इनमें से किसी एक मार्ग का अनुसरण करता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए ज्ञान, कर्म और भक्ति तीनों मार्ग ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य शब्द: पुरुषार्थ, आत्म-ज्ञान / तत्त्व-ज्ञान, निष्काम कर्म, भक्ति-मार्ग मोक्ष-प्राप्ति
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