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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v12.i3.1
डॉ. विद्या चरण
असिस्टेंट प्रोफेसर – हिंदी
राजकीय महाविद्यालय बक्खा खेड़ा, उन्नाव
यद्यपि श्रम के स्वरूप पर आधारित सामाजिक व्यवस्था विश्व की अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी मिलती है, तथापि भारतीय चातुर्वर्ण्य समाज व्यवस्था अपनी एक विशेषता के कारण इन सबसे अलग है और शायद एकलौती भी। भारतीय समाज में इस चातुर्वर्ण्य के अतिरिक्त भी एक विशाल मानव समुदाय का अस्तित्व विद्यमान है, जिन्हें हम अन्त्यज, अछूत, दलित एवं भारतीय संविधान की शब्दावली में अनुसूचित जाति के रूप में जानते हैं।
‘दलित’ शब्द नया शब्द नहीं है। यद्यपि यह शब्द विगत दो-तीन दशकों में ही व्यापक प्रचलन में आया है, तथापि स्पष्ट रूप से इसका उपयोग 1930 में ‘पददलित वर्गों’ के हिन्दी एवं मराठी अनुवाद के रूप में किया गया था। इस शब्द का प्रथम उल्लेख हमें पुणे से 1930 में प्रकाशित ‘दलित-बन्धु’ में प्राप्त होता है। वर्तमान में यह आधुनिक मराठी, गुजराती, हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का एक अति प्रचलित शब्द है, जिसका सामान्य अर्थ है—उत्पीड़ित अथवा विखण्डित।
जहाँ तक ‘दलित’ शब्द के शब्दकोशीय अर्थ का प्रश्न है—संस्कृत हिन्दी शब्दकोश में ‘दलित’ शब्द के अर्थ को इस प्रकार व्यक्त किया गया है—“दल्-क्त अर्थात् टूटा हुआ, चीरा हुआ, फाड़ा हुआ, फटा हुआ, टुकड़े-टुकड़े हुआ और अन्य अर्थ में खुला हुआ, फैलाया हुआ।” हिन्दी शब्दकोश में दलित शब्द का अर्थ—जिसका दलन और दमन हुआ है, जो दबाया गया है, उत्पीड़ित, शोषित, सताया हुआ, गिराया हुआ, विनष्ट, मर्दित, पस्त-हिम्मत, हतोत्साहित, वंचित आदि मिलता है। अंग्रेजी भाषा में दलित शब्द का समानार्थी शब्द ‘डिप्रेस्ड’ है, जिसका अर्थ है—दबाया हुआ, झुकाया गया, धीमा किया गया एवं नीचा दिखाया गया आदि।
भारतीय संविधान में ‘दलित’ शब्द का उल्लेख प्राप्त नहीं होता है, किन्तु जिन आधारों पर किसी मानव समुदाय अथवा जातीय-समूह को अनुसूचित जाति माना जाता है, वे सभी आधार दलित जातियों से ही सम्बन्धित हैं। इस दृष्टि से विचार करने पर ‘दलित’ शब्द का अर्थ होगा—सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भागीदारी के स्तर पर शून्य ऐसे समुदाय, जिनके साथ अस्पृश्यता का व्यवहार किया जाता हो।
संदर्भ :-
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