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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v14.i2.1
डॉ. के. श्रीकृष्ण
M.A, Ph.D
प्राध्यापक
शोध निर्देशक , हिन्दी विभाग
आचार्या नागार्जुना विश्व विद्यालय
गुंटूर
षेक. बाजी
M.A, (Ph.D) हिन्दी पण्डित
शोध छात्रा
आचार्या नागार्जुना विश्व विद्यालय
गुंटूर
Abstract
ममता कालिया के उपन्यासों में ‘नारी शक्ति’ का चित्रण यथार्थवादी और सशक्त है, जहाँ वे नारियों को शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष करते हुए दिखाती हैं,जो पारंपरिक बंधनों को तोड़कर अपनी पहचान और स्वतंत्रता के लिए लड़ती हैं, खासकर ‘एक पत्नी के नोट्स’ और ‘लड़कियाँ’ जैसे उपन्यासों में, जहाँ कामकाजी और शिक्षित नारी के संघर्ष, मानसिक हिंसा और पारिवारिक चुनौतियों को गहराई से दर्शाया गया है, जो नारी को अबला नहीं, बल्कि कर्मठ और स्वाभिमानी बनाती हैं। ममता कालिया के साहित्य में नारी शक्ति का अर्थ है एक ऐसी सशक्त, आत्मनिर्भर और सजग स्त्री जो रूढ़ियों को तोड़कर अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष करती है, चाहे वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो या परिवार और समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए मानसिक दृढ़ता दिखाती हो, और अपनी बुद्धिमत्ता व कर्मठता से हर क्षेत्र में आगे बढ़ती है, अक्सर परिवार और रिश्तों के तनाव के बीच भी अपनी अस्मिता बनाए रखती है।
संदर्भ ग्रन्थ सूची:-
- बेघर(1971), नरक दर नरक(1975), प्रेम कहानी(1980), लड़कियाँ(1987), एक पत्नी के नोट्स(1997), दौड़(2000), अँधेरे का ताला(2009), दुक्खम् – सुक्खम्(2009) कल्चर वल्चर(2016),सपनों की होम डिलीवरी(2017) – ममता कालिया
- हिन्दी साहित्य का इतिहास – आचार्या रामचन्द्र शुक्ल
- प्रभा खेतान,(अनुवादक) : स्त्री : उपेक्षिता, हिन्द पॉकेट बुक्स, 2002, पृ. 24
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- स्रवंति द्विभाषा मासिक पत्रिका – दक्षिण भरत हिंदिप्रचार सभा – हैदराबाद
- इंटर नेट से – सरला , नरसराव पेट
- ममता कालिया – बेघर (भूमिका से पृ0 11 तक की संदर्भित बिन्दू)
- ममता कालिया – प्रेम कहानी (पृ. 17)
- ममता कालिया – एक पत्नी के नोट्स (पृ. 38)
- ममता कालिया के उपन्यास में चित्रित समश्याएँ विविध आयाम डॉ लहू रामाराव मुंडे पुजा पोब्लिके शसन्स कानपुर प्र. सं2016:
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