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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrsml.v14.i3.3
प्रीति रानी
शोध छात्र, योग विभाग
महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय धैड़ गाँव, शिव नगर पोखड़ा पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड
डॉ.भारत भूषण सिंह
शोध निर्देशिक एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, योग विभाग
महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय धैड़ गाँव, शिव नगर पोखड़ा पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड
शोध सार
ओशो के व्यक्तित्व में अनंत आयाम समाहित हैं, शब्दों में उन्हें बांध पाना असंभव है, सर्वाधिक शब्दों का उपयोग करने वाले ओशो सदा निःशब्द को अभिव्यक्त करते रहे। ‘आध्यात्मिकता’ को दैनिक दिनचर्या में समाहित कर दिया। ओशो के योगदान को वर्णित करने का प्रयास सागर को बूंद से परिभाषित करने जैसा है जो कि गुणात्मक रूप से भिन्न तो नहीं पर मात्रात्मक रूप से अपर्याप्त अवश्य है। ओशो ने नवीन को पुरातन पर वरीयता दी। ध्यान को औषधि रूप में दिया। जागरण को समाधान बताया, परम्परा को निर्मूल नहीं किया वरन परम्परा का शोधन किया। संन्यास को पुनर्जीवित किया। भारत को उसके अर्थ से पुनर्मंडित किया, गुरु-शिष्य परम्परा को उदात्त बनाया, काम को राम की सीढ़ी बता कर काम निंदा से मुक्त किया, ओम्कार का सम्पूर्ण विज्ञान दिया। समस्त संतों की मूल देशना को पुनर्जीवित किया, विश्व के पाखंडों पर निर्भीक प्रहार किया, विश्व को लोकतंत्र का वस्तुगत अर्थ बताया। सत्य को व्यक्तिगत संपदा बता हमें आत्मनिर्भर किया। वेदों से लेकर आधुनिक गुर्जिएफ तक का सूत्र दिया। पंडित- पुरोहित को बेखौफ ललकारा। मानवमात्र के आत्मज्ञान व प्रेम की मशाल प्रज्वलित की, भौतिकवाद को अध्यात्म का पूरक बना दिया, संसार व परमात्मा के द्वैत को समाप्त किया। उत्सव और आनंद को स्वार्थ दृष्टि से मुक्त किया। सच्ची धार्मिकता का सिंहनाद किया, जिसकी अनुगूंज प्रखरतर होती चली जा रही है। ओशो के पास हर प्रश्न का जवाब है और हर जवाब लाजवाब है। अतः प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से आचार्य रजनीश के कृतित्व को निम्नरूपेण प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
बीज शब्द– ओशो, आचार्य रजनीश, कृतित्व, योग, योगदान,
संदर्भ सूची
1-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 139- 161
2-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 184-188
3-सदैव शशिकांत,2010,कौन है ओशो,डायमंड पॉकेट बुक्स,ओखला, नई दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 219- 226
4-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 130-136
5-सदैव शशिकांत,2010,कौन है ओशो,डायमंड पॉकेट बुक्स,ओखला, नई दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 238-241
6-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 162-173
7-सदैव शशिकांत,2010,कौन है ओशो,डायमंड पॉकेट बुक्स,ओखला, नई दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 227- 232
8-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 111- 120
9-सत्यार्थी स्वामी आनंद,(2010,चतुर्थ संशोधित संस्करण),सक्रिय ध्यान के रहस्य ,ओशो दर्शन आश्रम, सदरपुर गढ़शंकर-144527 (पंजाब),पृष्ठ संख्या-37
10-सत्यार्थी स्वामी आनंद,(2010,चतुर्थ संशोधित संस्करण),सरल ध्यान विधियाँ-भाग-1, ओशो दर्शन आश्रम, सदरपुर गढ़शंकर-144527 (पंजाब),पृष्ठ संख्या- 6
11-सत्यार्थी स्वामी आनंद,(2010,चतुर्थ संशोधित संस्करण),सरल ध्यान विधियाँ-भाग-2, ओशो दर्शन आश्रम, सदरपुर गढ़शंकर-144527 (पंजाब),पृष्ठ संख्या- 8-28
12-सदैव शशिकांत, (2020), ओशो का इस जगत को योगदान, प्रभाकर प्रकाशन पांडव नगर, ईस्ट दिल्ली, पृष्ठ संख्या- 215- 224